गज़ल

दिल पर किसकी दस्तक हुई पता कर
भीड बहुत है बस्ती में, साथ चला कर

महताब मेरे ,ईद का चांद न बन ,
रोज ना सही ,रात पूनम की मिला कर

बरकत , मौत , फासले फैसले तुमने तय किये
इन्शान खुदा ना बन सबका , तू भी खता कर

इशक़ ऐसा की , जीता दिया खुद से
गलत फहमी उसे , जीत गयी मुझे हरा कर

बेहद नादान हुँ में, सुझाये बिन नही समझता
ख्याल जो भी हो , समझा मुझे जता कर

वो गंवार अनपढ़ , उसकी सोच घिनोनी है
यार अच्छा किया अपनी सोच बता कर

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